कोरबा। शासकीय इं. वि. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा में आज दिनांक 11 मार्च 2026 को “इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (प्च्त्) अवेयरनेस वर्कशॉप” का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (डैडम्), भारत सरकार के प्रयोजकत्व में तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर एवं शासकीय इं.वि. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा नवाचार, शोध और आविष्कारों के संरक्षण के महत्व को समझाना था। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा बौद्धिक संपदा से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. बी. एल. साय ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों को नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात कार्यशाला के संयोजक डॉ. श्याम सुंदर तिवारी (सहायक प्राध्यापक, भौतिकी विभाग) ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. अमित दुबे (साइंटिस्ट ‘D’, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर) ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी नवाचार, उत्पाद या शोध कार्य की सुरक्षा के लिए पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा जीआई टैग जैसे अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने शोध और नवाचार को सुरक्षित रखने तथा उसे व्यावहारिक रूप से उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इनोवेटिव रिसर्च सेंटर के माध्यम से विद्यार्थी और शोधार्थी अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं।
विशिष्ट वक्ता सुश्री चंचल श्रीवास्तव (प्रबंधक, जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र कोरबा ) ने युवाओं को रोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए स्टार्टअप कंपनियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई स्टार्टअप पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी CG Startup Policy 2026 लागू की है। इस नीति के तहत युवाओं को नवाचार आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन सुविधाएं तथा विभिन्न प्रकार की प्रोत्साहन योजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
विशिष्ट वक्ता श्री अवि गर्ग (आईपीआर लॉयर) ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने इनोवेटिव आइडिया या उत्पाद के लिए पेटेंट फाइल कर सकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार के लिए हमेशा बड़े या जटिल विचारों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे नए विचार भी पेटेंट के माध्यम से संरक्षित किए जा सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने नवाचारों को कानूनी रूप से सुरक्षित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. अवंतिका कौशिल एवं डॉ. दिनेश श्रीवास द्वारा किया गया। कार्यशाला के अंत में आभार प्रदर्शन कार्यशाला के सचिव सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप शुक्ला द्वारा किया गया।
इस कार्यशाला में डॉ. महेंद्र चंद्रवंशी साइंटिस्ट, कोरबा शहर के व्यापारीगण जिला उद्योग संघ से अध्यक्ष श्रीकांत बुधिया, संजय खरे, गोपाल पटेल संजय केडिया, सुभाष अग्रवाल, एस.एल.माथुर जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स से उपाध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी, महामंत्री नरेन्द्र अग्रवाल मिडिया प्रभारी अनिल अग्रवाल, राहुल मोदी, नरेश अग्रवाल भी उपस्थित रहें । महाविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी कार्यशाला में सम्मिलित होकर बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी का लाभ उठाया। उक्त जानकारी संयोजक डॉ. श्याम सुंदर तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी ।
