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स्कूल ने बच्चों को कराया नई शिक्षा नीति के तहत जंगल भ्रमण, जितेन्द्र सारथी ने जीवन परिचाय देते हुए जंगल एवम वन्य जीवों के महत्व को समझाया

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कोरबा | दिनांक 15/04/2023 शनिवार को कोरबा के  स्कूल में नई शिक्षा नीति का अनुसरण कराते हुए विद्यालय के संस्थापक  प्रमोद झा एवं सह निर्देशक प्रांजल झा जी के सानिध्य एवम प्रबंधक डॉ डी के आनंद ,विद्यालय की प्राचार्य श्रीमति लता पाटिल के उचित मार्गदर्शन में विद्यालय के विभिन्न विभागीय शिक्षको द्वारा छात्रो से अन्यान्य गतिविधियां सम्पादित कराई गई, जहा एक तरफ बच्चों को गणितीय ज्ञान, भाषिक अनुभव और विभिन्न क्रियाकलाप शिखाए गए, बच्चों में सिखा वन एवम वन्य जीव संरक्षण का गुर, इंट्रा पर्सनल एव इंटेलिजेंस क्लब के छात्रों द्वारा जंगलों में रहने वाले विविध जीव जन्तु के विषय में जानने और हिंसक जीवों से अपनी सुरक्षा एवम वन्यजीवो जैसे सर्प आदि के जीवनशैली तथा इस संसार में उनकी उपस्थिति के महत्व को समझते हुए एवम उनके सरंक्षण के लिए किए जानें वाले उपायों को जानने एवम समझने के लिए कोरबा के वन्य जीव संरक्षक एवम सर्प मित्र के नाम से जानें जाते जितेन्द्र सारथी अपने टीम के बृजेश सिंह और नागेश सोनी जी के द्वारा शहर से दूर राजगामार जंगल के बाघमाडा में लेजाकर साक्षात्कार कराया , जिसमें बच्चों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला, बच्चों में एक अलग ही जिज्ञासा दिखाई पड़ रही थीं, बच्चों ने जितेन्द्र सारथी के जीवन परिचय को सुना उसके साथ ही बच्चों ने अनेकों सवाल पुछा जिसका जवाब सुन बच्चे बड़े उत्साहित हो रहे थे, कुछ घंटे के सवाल जवाब और भ्रमण के बाद बच्चों के प्राकृतिक आवास पर लाए नस्ता किया फिर बच्चों ने जंगल से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातों को बड़े गौर से सुना, वन में रहने वाले जंगली जानवरों को दिन चारिया और उसकी भूमिका से साक्षात्कार हुए, छोटे बच्चों को जंगल के भीतर बहुत ही अच्छा लग रहा था, स्कूल के शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा, निश्चित ही इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों के मन में जंगल और वन्य जीवों के सरंक्षण भाव उत्पन्न होंगी।

जितेन्द्र सारथी ने बताया इस तरह का कार्यक्रम या जंगल भ्रमण हर स्कूल को करना चाहिए, किताबों को दुनियां के साथ वास्तुविक दुनियां को जानना बच्चों के विकास के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा, जहा बच्चों को हाथी, बाघ, तेंदवा, किंग कोबरा, साही, कहट, उड़ान गिल्लहरी, तितलियां, पक्षियों ,उदबिलाव आदि जैसे जीवों को जाना वही जंगल में पहाड़ों से आने वाली जल श्रोतों को जाना साथ ही जंगल में आग लगने के नुकसान को समझाया गया। उक्त जानकारी जितेन्द्र सारथी के द्वारा दी गई


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