February 23, 2026
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गोधन न्याय योजना से महिलाओं ने केंचुआ बेचकर कमाये 8 लाख 95 हजार रुपये

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कोरबा 16 दिसंबर 2022/छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में लगातार सकारात्मक बदलाव ला रही है। जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत चिर्रा की चंद्रमुखी स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा 30 क्विंटल 20 किलो केंचुआ उत्पादन किया गया है। महिलाओं ने उत्पादित कंेचुआ को विभिन्न गोठानो में बेचकर आठ लाख 95 हजार रुपये कमाये हैं। जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से वह खुश हैं। सीईओ जिला पंचायत श्री नूतन कंवर ने बताया कि गोधन न्याय योजना से जहां लोगों को 2 रुपये किलो की दर से गोबर बेचकर आर्थिक लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाएं गोठानो में वर्मी खाद बनाकर, केचुआ उत्पादन करके लाभ कमा रहीं है। इन गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
चंद्रमुखी समूह की अध्यक्ष ललिता देवी राठिया ने बताया कि उनके समूह में 10 महिला सदस्य हैं जो कि सभी गोठान में वर्मी खाद बनाने के साथ ही केंचुआ उत्पादन का कार्य करती हैं। समूह के द्वारा वर्ष 2021 में करीब 15 क्विंटल 80 किलो केंचुआ उत्पादन किया गया था, जिसे 250 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से जिले सहित सरगुजा एवं रायगढ़ जिला के गोठान नोडल अधिकारियों ने आकर खरीदा। इससे समूह को 3 लाख 95 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। अप्रैल से अक्टूबर 2022 तक 13 क्विंटल 60 किलो केंचुआ उत्पादन किया गया जिसे जनपद पंचायत कटघोरा, पोड़ी उपरोडा, वन विभाग विभाग आदि को बेचकर 3 लाख 40 हजार रुपये अर्जित किए। नवंबर 2022 में 80 किलोग्राम शुद्ध केचुआ दो हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से जिले की विभिन्न गोठानो, वन विभाग तथा रायगढ़ जिला के गोठान नोडल अधिकारियों ने चिर्रा गोठान से खरीदा है जिससे समूह को 1 लाख 60 हजार प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार गोधन न्याय योजना के प्रारंभ से लेकर आज तक चंद्रमुखी समूह द्वारा 30 क्विंटल  20 किलो केंचुआ उत्पादन किया गया है। जिसे बेचकर 8 लाख 95 हजार रुपए कमाए है। जिसमें से समूह के 10 महिला सदस्यों ने 50 – 50 हजार रुपये आपस बांटे हैं। शेष करीब 3 लाख 95 हजार रुपये समूह के पास जमा है। समूह के महिला सदस्यों का कहना है कि गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ सरकार की बहुत ही लाभकारी योजना है जिससे हम ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही आजीविका के साधन प्राप्त हो रहे हैं और हम स्वावलंबी बन रहे है।
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