नशा आज समाज की एक गंभीर समस्या बन चुका है। शराब, तंबाकू, गुटखा, ड्रग्स आदि नशीले पदार्थों की लत न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि पूरे परिवार के जीवन को भी अस्त-व्यस्त कर देती है। परिवार, जो प्रेम, सहयोग और सुरक्षा का केंद्र होता है, नशे के कारण विवाद, तनाव और टूटन का शिकार हो जाता है।
नशे की लत व्यक्ति की सोच और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। नशे में व्यक्ति क्रोधी, चिड़चिड़ा और हिंसक हो सकता है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं, जिससे परिवार का वातावरण अशांत हो जाता है। पति-पत्नी के बीच आपसी विश्वास कम हो जाता है और बच्चों पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है।
आर्थिक दृष्टि से भी नशा परिवार के लिए विनाशकारी सिद्ध होता है। नशीले पदार्थों पर अनावश्यक धन खर्च होने से घर की आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पातीं। कई बार कर्ज की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे परिवार में तनाव और विवाद और बढ़ जाते हैं। बच्चों की शिक्षा, पोषण और भविष्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है।
नशे के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। परिवार को समाज में अपमान और तिरस्कार सहना पड़ता है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों से संबंध खराब हो जाते हैं, जिससे परिवार सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ने लगता है। यह स्थिति परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है।
इस समस्या का समाधान केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है। परिवार के सदस्यों को प्रेम, धैर्य और समझदारी से नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति को सही मार्ग पर लाने का प्रयास करना चाहिए।
नशे की शुरुआत अक्सर शौक या तनाव से बचने के साधन के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत बन जाती है। लत लगने के बाद व्यक्ति का आत्मनियंत्रण कमजोर हो जाता है और वह छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सम्मान और प्रेम कम होने लगता है।
नशे के कारण महिलाओं को सबसे अधिक कष्ट सहना पड़ता है। कई घरों में नशे के प्रभाव में पति द्वारा पत्नी के साथ दुर्व्यवहार, मारपीट और अपमान किया जाता है। यह स्थिति महिलाओं के आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
बच्चों पर इसका प्रभाव दीर्घकालीन होता है। नशे के माहौल में पलने वाले बच्चे या तो डरपोक हो जाते हैं या फिर आक्रामक स्वभाव अपना लेते हैं। कई बार वे पढ़ाई छोड़ देते हैं या गलत संगति में पड़ जाते हैं, जिससे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक यह समस्या बढ़ती जाती है।
नशा पारिवारिक विवाद को सामाजिक बदनामी में भी बदल देता है। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के सामने परिवार की छवि खराब होती है, जिससे सामाजिक अलगाव बढ़ता है और परिवार अकेला पड़ जाता है।
समाधान के उपाय के रूप में—परिवार में खुला संवाद और आपसी समझ बढ़ाई जाए नशे से ग्रस्त व्यक्ति को ताने देने के बजाय उपचार और काउंसलिंग दिलाई जाए बच्चों को सकारात्मक वातावरण और नैतिक शिक्षा दी जाए समाज में नशामुक्ति अभियानों को प्रोत्साहन दिया जाए

नूपुर अग्रवाल, कोरबा
